
राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह, गरिमा और हिमाचली लोक संस्कृति के रंगों के साथ मनाया, नाटक और लोकनृत्य ने बांधा समां
समाचार दृष्टि ब्यूरो/राजगढ़
राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह, गरिमा और हिमाचली लोक संस्कृति के रंगों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में करीब 300 विद्यार्थियों ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय लोक परंपराओं, लोक संगीत, प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और पीढ़ियों से चले आ रहे लोक ज्ञान के महत्व से परिचित करवाना रहा।
•हमारे फेसबुक पेज पर दिए Linkसे जुड़िए :-https://www.facebook.com/SamacharDrishtiLive/
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद महाविद्यालय परिवार की ओर से कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दाहन गांव निवासी करीब 80 वर्षीय प्रसिद्ध लोक गायिका एवं जड़ी-बूटी विशेषज्ञ विद्या देवी तथा उनके साथ पहुंचे अतिथियों का हिमाचली पारंपरिक धाटू और सदरी भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
औषधीय जड़ी-बूटियों की पहचान और उपयोग की दी जानकारी
मुख्य अतिथि विद्या देवी ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों की पहचान तथा उनके पारंपरिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न औषधीय पौधे दिखाते हुए बताया कि ग्रामीण समाज में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सदियों से पारंपरिक उपचार के लिए किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते समय के कारण पारंपरिक ज्ञान नई पीढ़ी से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। ऐसे में लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और स्थानीय वनस्पतियों से जुड़ी जानकारी को संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विद्या देवी ने अपने अनुभवों के साथ विद्यार्थियों को लोक संस्कृति की मौखिक परंपरा से भी जोड़ा। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज में पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किया, जिस पर विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों ने खूब तालियां बजाईं। कार्यक्रम में उनके साथ सोहन सिंह और नरेश कुमार भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
लोक संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर जोर
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीनू भास्कर ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और लोक ज्ञान से होती है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में भावी पीढ़ी को अपनी समृद्ध लोक विरासत से जोड़ना बेहद जरूरी है।
उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और स्थानीय वनस्पतियों से संबंधित ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर अपनी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय ज्ञान को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
नाटक, भाषण और लोकनृत्य ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान भारत स्काउट्स एंड गाइड्स से जुड़े विद्यार्थियों ने नाटक, भाषण और रंगारंग लोकनृत्य प्रस्तुत किए। स्काउट्स, रेंजर्स और रोवर्स की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में हिमाचली लोक संस्कृति के रंग भर दिए।
विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक मूल्यों, लोक संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान महाविद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के प्रभारी डॉ. विपिन ठाकुर और डॉ. शशि किरण के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को करीब से समझने में गहरी रुचि दिखाई।
महाविद्यालय स्टाफ ने भी लिया हिस्सा
कार्यक्रम में प्राध्यापक वर्ग से प्रो. जगमोहन ठाकुर, प्रो. रमेश चौहान, प्रो. प्रमोद, प्रो. अंकुर सूद, प्रो. अमिता मेहता, डॉ. पंकज, डॉ. हीरा क्षेत्री, प्रो. विनोद शर्मा और प्रो. पूनम उपस्थित रहे।
पुस्तकालय विभाग से अनिल कुमार और विनोद कुमार तथा गैर-शिक्षक वर्ग से सुलेखा, सीमा, राकेश, कमला, चंद्रा और मैना सहित अन्य कर्मचारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
लोक विरासत को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों, अतिथियों और महाविद्यालय कर्मचारियों को अल्पाहार वितरित किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने स्थानीय लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी विरासत को समझा तथा इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल विश्व आदिवासी दिवस के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक विरासत से जोड़ने की एक सार्थक पहल के रूप में भी सामने आया।
ये भी पढ़ें-
Sirmour:यूनाइटेड वेटरन्स एसोसिएशन सराहाँ ने चिराग अकादमी के छात्रों को किया सम्मानित
Political:2032 तक हिमाचल को देश का सबसे उन्नत और आत्मनिर्भर राज्य बनाएंगे: मुकेश शर्मा




