

श्रीवामन द्वादशी मेला सराहां में कलाकारों ने नाटी और हिंदी-पहाड़ी गीतों से बांधा समां, देर रात तक झूमते रहे दर्शक
समाचार दृष्टि ब्यूरो / सराहाँ (सिरमौर )

पच्छाद उपमंडल मुख्यालय सराहां में बुधवार से शुरू हुए तीन दिवसीय राज्य स्तरीय श्री वामन द्वादशी मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या प्रसिद्ध कलाकार कुमार साहिल, हनी और भारती शर्मा के नाम रही। सांस्कृतिक संध्या में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं कांग्रेस जिला सिरमौर अध्यक्ष आनंद परमार विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
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उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने मेले में लगाई गई विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन कर उनका शुभारंभ किया। इस अवसर पर एसडीएम पच्छाद डॉ. प्रियंका चंद्रा ने उद्योग मंत्री को शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
स्थानीय कलाकारों ने भी जमाया रंग
सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं। नितिन कौशल ने नीलिमा-नीलिमा गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं राजेश त्यागी ने ओ बस गई दिल्ली रे मेरी प्यारिएं, तू तो जौनसारिय, दिल तो दीवाना होता है, रोहड़ू जाना मेरी आमिए और दिल्ली से मनाली यह लड़का तेरा दीवाना जैसे गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
भारती शर्मा ने अपनी सुरीली आवाज से माहौल को और रंगीन बना दिया। उन्होंने तेरी उम्मीद तेरा इंतजार करते हैं, मत छेड़ सांवरिया मेरी बाली उमरिया पाप लगेगा, रोया रातड़ी काटी लेने सोगिए बेदनी तेरी, ओ नीलिमा ओ नीलिमा सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। गाड़ी शिमला स्टेशन से आई और रोहड़ू जाना मेरी आमिए पर दर्शकों ने जमकर नृत्य किया।
इसके अलावा ममता डांस ग्रुप और झंकार बैंड ने भी अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।
कुमार साहिल की प्रस्तुति पर देर रात तक झूमे दर्शक
पहली सांस्कृतिक संध्या के स्टार कलाकार कुमार साहिल ने मंच संभालते ही माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। उन्होंने कोई मिल गया, तुम मेरे हीरो हो, ऐ बचना हसीनों मैं आ गया, बदन पे सितारे लपेटे हुए, जरा पास आ जाओ सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए।
कुमार साहिल ने पहाड़ी और हिंदी गीतों का ऐसा मिश्रण पेश किया कि दर्शक देर रात तक अपनी सीटों पर टिक नहीं पाए। तेरा मेरा प्यार बचपनोरा, कुल्लू मनाली लगा दिल मेरा इंदिरा, एक आदिया मंगवाई जा पीने को जीव बोलदा, बाटा जंदा सीटियां मा, लच्छी-लच्छी लोग गलांनदे लच्छी मेरा नाम सजना, लाल चिड़िया ओ लाल चिड़िया जैसे गीतों पर खूब तालियां बजीं।
इसके बाद सीटी बजाई नखरे दिखाए, ओ लड़की आंख मारे, तारे गिन-गिन जो जागे रातों को और सावन में लग गई आग जैसे गीतों ने सांस्कृतिक संध्या में चार चांद लगा दिए।
सराहां की पहली सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय लोक संस्कृति, पहाड़ी गीतों और हिंदी फिल्मी गीतों का शानदार संगम देखने को मिला। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते और नाचते रहे।
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