
नाहन डिपो से 25 इलेक्ट्रिक बसों में से 10 दूसरे डिपो भेजीं, 7 डीजल बसें भी हुईं शिफ्ट; सिरमौर में दो दर्जन से अधिक रूट प्रभावित होने का दावा
समाचार दृष्टि ब्यूरो / नाहन
जिला सिरमौर के एकमात्र हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) नाहन डिपो को इलेक्ट्रिक बस डिपो बनाने की प्रदेश सरकार की योजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। जुलाई से अगस्त के बीच नाहन डिपो को मिली 25 इलेक्ट्रिक बसों में से महज दो महीने के भीतर 10 बसें दूसरे डिपो को भेज दी गईं। इतना ही नहीं, 7 डीजल बसें भी नाहन से शिमला जिला के विभिन्न डिपो में स्थानांतरित कर दी गईं।
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स्थानीय स्तर पर इसे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला कदम बताया जा रहा है। दावा है कि बसों की कमी के कारण सिरमौर में दो दर्जन से अधिक बस रूट प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है।
जुलाई में मिलीं 15, फिर 10 और इलेक्ट्रिक बसें
जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार ने जुलाई माह में नाहन डिपो को 15 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई थीं। इसके बाद 20 अगस्त तक 10 और इलेक्ट्रिक बसें नाहन डिपो पहुंचीं। कुल मिलाकर सिरमौर को 25 इलेक्ट्रिक बसें मिलीं।
इसके बाद 4 अगस्त को उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नाहन बस स्टैंड पर इलेक्ट्रिक बसों का विधिवत शुभारंभ किया था। उस समय नाहन डिपो को ई-डिपो के रूप में विकसित किए जाने की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब इन बसों के दूसरे डिपो में भेजे जाने से योजना की दिशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रोहड़ू, रामपुर और पठानकोट भेजीं 10 ई-बसें
नाहन डिपो से हटाई गई 10 इलेक्ट्रिक बसों में से 3 रोहड़ू, 2 रामपुर और 5 पठानकोट डिपो को भेजी गई हैं। वहीं 7 डीजल बसों को भी शिमला जिला के अलग-अलग डिपो में भेजा गया है।
इनमें 2 बसें नेरवा, 2 तारादेवी, 2 रोहड़ू और 1 बस लोकल यूनिट शिमला भेजी गई है। इसके अलावा एक और बस लोकल यूनिट शिमला भेजे जाने की बात कही जा रही है।
चार ई-बस डिपो बनाने की घोषणा, लेकिन चार्जिंग ढांचा अधूरा
प्रदेश सरकार ने चार ई-बस डिपो बनाने की घोषणा की थी। इनमें नादौन, हरोली और ठियोग में नए बस डिपो बनाए गए, जबकि सिरमौर के नाहन डिपो को अपग्रेड कर ई-बस डिपो बनाने की घोषणा की गई थी।
हालांकि, सिरमौर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। पिछले तीन वर्षों से इलेक्ट्रिक बसों को लेकर कवायद चलने के बावजूद जिले के सभी प्रमुख बस स्टैंड पर चार्जिंग सुविधा विकसित नहीं हो सकी है।
फिलहाल नाहन बस स्टैंड, नाहन वर्कशॉप और पांवटा साहिब बस स्टैंड में चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध होने की जानकारी है।
कई क्षेत्रों में बस स्टैंड तक नहीं
सिरमौर में पांवटा साहिब, नाहन, सराहां और राजगढ़ में निगम के अपने बस स्टैंड भवन हैं। वहीं संगड़ाह, शिलाई, श्रीरेणुकाजी, नौहराधार और हरिपुरधार जैसे क्षेत्रों में निगम के बस स्टैंड भवन नहीं हैं। यहां बसें सड़क किनारे ही रुकती और खड़ी होती हैं।
ऐसे में जिले में इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क बढ़ाने से पहले चार्जिंग और पार्किंग सहित आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना भी बड़ी चुनौती है।
10 बसें कंडम, पांच और जल्द होंगी बाहर
जानकारी के अनुसार करीब तीन माह पहले नाहन डिपो की 10 बसें कंडम हो चुकी हैं। वहीं अक्टूबर के अंत तक करीब 5 और बसों के कंडम होने की संभावना है। ऐसे में एक तरफ पुरानी बसें बेड़े से बाहर हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर नई इलेक्ट्रिक और डीजल बसों को दूसरे डिपो में भेजे जाने से नाहन डिपो पर बसों की कमी और बढ़ने की आशंका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाहन को वास्तव में ई-डिपो के रूप में विकसित करना है, तो नई बसें दूसरे डिपो में भेजने के बजाय सिरमौर के मौजूदा रूटों को मजबूत करना जरूरी है।
विधायक अजय सोलंकी बोले—बसें वापस मंगवाई जाएंगी
नाहन विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि नाहन डिपो से 10 इलेक्ट्रिक और 7 डीजल बसें प्रदेश के विभिन्न डिपो में भेजे जाने के मामले को लेकर परिवहन मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी बसों को वापस नाहन मंगवाया जाएगा।
अब सवाल यह है कि जब नाहन को ई-डिपो बनाने की घोषणा के बाद 25 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई गई थीं, तो महज दो महीने में 10 इलेक्ट्रिक बसों और 7 डीजल बसों को दूसरे डिपो में भेजने की जरूरत क्यों पड़ी? सिरमौर की जनता अब इस पूरे मामले पर परिवहन निगम और सरकार से स्पष्ट जवाब की उम्मीद कर रही है।
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