
मेजर मनकोटिया केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हिमाचल की राजनीति में अपनी बेबाक शैली, स्पष्टवादिता और राजनीतिक तेवरों के लिए अलग पहचान रखने वाले नेता थे
समाचार दृष्टि ब्यूरो / शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेता, पूर्व मंत्री और शाहपुर से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका निधन हृदयाघात के कारण हुआ।
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मेजर मनकोटिया केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हिमाचल की राजनीति में अपनी बेबाक शैली, स्पष्टवादिता और राजनीतिक तेवरों के लिए अलग पहचान रखने वाले नेता थे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने वर्ष 1982 में शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी शाहपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इस तरह वह पांच बार विधायक रहे। ([The Indian Express][2])
दो बार संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
मेजर मनकोटिया ने हिमाचल सरकार में **पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री** के रूप में दो बार जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1993 में कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने के बाद उनका तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ राजनीतिक संबंध कई उतार-चढ़ाव से गुजरा। वर्ष 2003 में भी उन्हें पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। ([The Indian Express][2])
2007 का ‘सीडी कांड’ बना राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़
मेजर मनकोटिया के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित अध्याय वर्ष 2007 रहा। कांग्रेस में रहते हुए उनके तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ मतभेद सार्वजनिक हो गए। मई 2007 में मनकोटिया ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और सीडी सार्वजनिक की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह और एक अधिकारी की बातचीत है और इसे कथित वित्तीय लेन-देन से जोड़ा था। इन आरोपों को उस समय संबंधित पक्षों ने स्वीकार नहीं किया था। रिकॉर्डिंग प्रकरण के बाद कांग्रेस ने मनकोटिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया।
यह प्रकरण आगे चलकर हिमाचल की राजनीति में चर्चित ‘सीडी कांड’ या ‘सीडी बम’ के नाम से जाना गया।
बदलते रहे राजनीतिक पड़ाव
मेजर मनकोटिया का राजनीतिक सफर कई दलों और राजनीतिक पड़ावों से होकर गुजरा। 1982 में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। वर्ष 1990 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर शाहपुर से जीत दर्ज की और बाद में फिर कांग्रेस में लौट आए। 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, जबकि 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे। 2017 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।
इसके बाद 25 अक्टूबर 2022 को बिलासपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
चार दशक से ज्यादा लंबा रहा राजनीतिक सफर
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का सार्वजनिक जीवन चार दशक से अधिक समय तक हिमाचल की राजनीति से जुड़ा रहा। सेना की सेवा से राजनीतिक मैदान तक पहुंचे मनकोटिया ने शाहपुर की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई और प्रदेश की सत्ता के गलियारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद हिमाचल के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है। विभिन्न नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का जाना हिमाचल की राजनीति के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसकी पहचान पांच बार की विधानसभा जीत और मंत्री पद के साथ-साथ उनकी बेबाक और मुखर राजनीतिक शैली से भी रही।
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