
2024-25 में 38.35 करोड़ रुपये शेष रहने का दावा, कार्ययोजना समय पर जमा न करने पर भी सुरेश कश्यप ने उठाए सवाल
समाचार दृष्टि ब्यूरो / सोलन
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत हिमाचल प्रदेश को उपलब्ध कराई गई धनराशि के उपयोग और वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत करने में कथित देरी को लेकर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
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सुरेश कश्यप ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में दून विधानसभा क्षेत्र के बद्दी में आयोजित रक्तदान शिविर में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया और रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
इसके बाद राष्ट्रीय आयुष मिशन से संबंधित सामने आई एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कश्यप ने कहा कि रिपोर्ट में बताए गए लेखा परीक्षा निष्कर्षों के अनुसार प्रदेश में उपलब्ध धनराशि के उपयोग और वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत करने को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों पर प्रदेश सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
तीन वर्षों की राशि का दिया ब्यौरा
कश्यप के अनुसार, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत हिमाचल प्रदेश में 2022-23 में 77.47 करोड़ रुपये का स्वीकृत आवंटन था, जिसमें से 39.59 करोड़ रुपये खर्च किए गए और वर्ष के अंत में 21.27 करोड़ रुपये शेष रहे।
उन्होंने बताया कि 2023-24 में 73.18 करोड़ रुपये के स्वीकृत आवंटन में से 55.89 करोड़ रुपये खर्च हुए तथा वर्ष के अंत में 27.56 करोड़ रुपये शेष बताए गए।
इसी तरह 2024-25 के अंत में 38.35 करोड़ रुपये शेष रहने और उस वर्ष 21.42 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है।
कश्यप ने कहा कि यदि ये आंकड़े लेखा परीक्षा रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों पर आधारित हैं, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उपलब्ध धनराशि का समयबद्ध उपयोग क्यों नहीं हो सका और इसके लिए क्या कदम उठाए गए।
कार्ययोजना जमा करने में देरी पर भी सवाल
सुरेश कश्यप ने कहा कि समाचार रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य की वार्षिक कार्ययोजना जमा करने की अंतिम तिथि 15 मार्च 2024 थी, जबकि हिमाचल प्रदेश की ओर से कार्ययोजना 17 मई 2024 को प्रस्तुत की गई।
उन्होंने कहा कि कार्ययोजना निर्धारित समयसीमा के बाद प्रस्तुत किए जाने के कारणों को सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इस देरी का राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के उपयोग पर क्या प्रभाव पड़ा।
कश्यप ने कहा कि रिपोर्ट में अगली किस्त प्राप्त करने से जुड़ी उपयोगिता प्रमाणपत्र और उपलब्ध राशि संबंधी शर्तों का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने सरकार से इन शर्तों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उपलब्ध संसाधनों के उपयोग पर मांगा विस्तृत विवरण
सुरेश कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन का उद्देश्य आयुष चिकित्सा सेवाओं और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना है। ऐसे में प्रदेश में उपलब्ध धनराशि का समयबद्ध एवं निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से पिछले तीन वित्त वर्षों में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत स्वीकृत राशि, जारी धनराशि, वास्तविक व्यय, वर्षवार शेष राशि, कार्ययोजनाओं की स्थिति और लंबित परियोजनाओं का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
कश्यप ने विशेष रूप से 2024-25 के अंत में बताई गई 38.35 करोड़ रुपये की शेष राशि के संबंध में सरकार से पूछा कि इसके उपयोग के लिए क्या योजना बनाई गई है और संबंधित कार्यों को पूरा करने की समयसीमा क्या निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि आयुष सेवाओं का लाभ प्रदेश की जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
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