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Himachal:जल संकट से निपटने के लिए नवीन सोच और जनभागीदारी जरूरी: डॉ. अभिषेक जैन

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उपमंडल पच्छाद परिसर में पौधारोपण करते डॉ. अभिषेक जैन
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डॉ. अभिषेक जैन ने विभागीय कार्यों में दक्षता, नवाचार, जवाबदेही और बेहतर जनसेवा को प्राथमिकता देने के दिए निर्देश

समाचार दृष्टि ब्यूरो / सराहां

जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन, आईएएस ने 16–17 अगस्त को जल शक्ति विभाग उपमंडल सराहां का दौरा कर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान अधीक्षण अभियंता नाहन, अधिशासी अभियंता राजगढ़ तथा सहायक अभियंता नारग एवं सराहां सहित विभागीय अधिकारी व फील्ड स्टाफ उपस्थित रहे।
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डॉ. अभिषेक जैन ने विभागीय कार्यों में दक्षता, नवाचार, जवाबदेही और बेहतर जनसेवा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई योजनाओं में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने तथा कृषि विकास संघ (KVS) के गठन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रत्येक जिले में एक प्रमुख नदी और उसकी सहायक नदियों के पुनर्जीवन के साथ-साथ बावड़ियों, कूहलों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए।

प्रधान सचिव ने कहा कि आगामी 20 वर्षों में विश्व के सामने जल संकट एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है। ऐसे में जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन के लिए अभी से नवीन एवं अभिनव समाधान विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नई सोच और तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी नई पेयजल अथवा सिंचाई योजना की प्लानिंग स्टेज से ही जन-सलाह और जनभागीदारी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे योजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होने के साथ-साथ अधिक प्रभावी और टिकाऊ बन सकेंगी।

इस अवसर पर डॉ. अभिषेक जैन ने उपमंडल परिसर में पौधारोपण भी किया और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के बीच नियमित संवाद स्थापित करने तथा असंगठित कार्यों को व्यवस्थित एवं संरचित तरीके से संचालित करने पर भी बल दिया।

डॉ. अभिषेक जैन के मार्गदर्शन से विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन, नवाचार और जन-केंद्रित सेवा वितरण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्राप्त हुए।

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