
कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं और आत्मा के संयुक्त जागरूकता शिविर में पांच दर्जन से अधिक किसानों ने लिया भाग
समाचार दृष्टि ब्यूरो / राजगढ़ (सिरमौर)
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत उपतहसील पझौता के हाब्बन में कृषि विभाग राजगढ़, कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं तथा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) के संयुक्त तत्वावधान में किसान जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में हाब्बन और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे पांच दर्जन से अधिक किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिक, प्राकृतिक एवं आधुनिक खेती की नवीनतम तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
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कार्यक्रम में कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ शिव राम ने किसानों को मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई तकनीकों तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान और समृद्ध भारत” की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब किसान बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप टिकाऊ एवं वैज्ञानिक खेती को अपनाएंगे।
उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण करवाकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी। इससे उत्पादन लागत कम होने, फसल की गुणवत्ता बढ़ने तथा मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है।
शिविर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए जीवामृत, घनजीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद सहित अन्य जैविक विकल्पों के उपयोग और उन्हें तैयार करने की विधियों की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी सुनिश्चित करती है।
किसानों को वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों की उपयोगिता से भी अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
शिविर के दौरान किसानों को नकली बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की पहचान करने के उपाय बताते हुए केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि आदान खरीदने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान और फसल हानि से बचाया जा सके।
कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील प्राकृतिक किसान बलदेव सिंह हाब्बी ने अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ बताए। उन्होंने खेती और बागवानी में उपयोग होने वाले जैविक कीटनाशक एवं खाद तैयार करने की व्यावहारिक विधियां भी विस्तार से समझाईं, जिससे किसान काफी प्रभावित हुए।
इस अवसर पर पंचायत प्रधान कृष्णा शर्मा, पंचायत प्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी तथा क्षेत्र के पांच दर्जन से अधिक किसान उपस्थित रहे। किसानों ने ऐसे जागरूकता शिविरों को समय की आवश्यकता बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।
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