April 15, 2024 10:42 am

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बिना कार्यकारणी के साथ चर्चा किए नए नियम को थोपने की कोशिश के खिलाफ संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ

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Samachar Drishti

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केवल कानून बनाने से नही होगा कुछ धरातल पर करने होगें आवश्यक सुधार : महासंघ

राजस्व कार्यों को निपटाए जाने के लिए बनाई गई समय सीमा से संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ नाराज, होगा आंदोलन करने पर विवश

समाचार दृष्टि ब्यूरो/सराहाँ

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में राजस्व अधिनियम को संशोधित कर जो नए नियम बनाए गए है। उससे संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ काफी नाराज है। उद्योग एवं आयुष मंत्री हर्षवर्धन चौहान को सौंपे ज्ञापन में महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश में पटवारी तथा कानूनगो की भारी कमी है। जो समय सीमा राजस्व कार्यों को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार ने निर्धारित की है। वह कर्मचारियों की कमी के कारण नहीं हो सकती तथा सरकार इसमें संशोधन करें।

पच्मछाद इकाई महासंघ के अध्यक्ष मनोज शर्मा का कहना है कि लोगों को समय पर सुविधा मिले, इसका महासंघ स्वागत करता है। मगर यह केवल कानून बनाने से नही होगा, मगर धरातल पर आवश्यक सुधार करने होगा। वर्तमान समय में पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार व तहसीलदार स्तर तक के 25 से 70 प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा पटवारी और कानूनगो को अपने राजस्व कार्य करने का तो समय ही नहीं मिल पाता।

महासंघ प्रदेश सरकार के ध्यान में लाना चाहता है कि प्रदेश में पटवारी, कानूनगो को सप्ताह में तीन दिन कार्यालय में जरूरी तौर पर बैठने, फसल घास व वर्षा के समय के बाद साल में 3-4 महीने ही फील्ड संबधी कार्य करने को मिलते है। एक कानूनगो ज्यादा से ज्यादा 5-7 निशानदेही के मामले एक माह में निपटा सकता है। जबकि उसके पास निशानदेही के प्रतिमाह 30 से 40 मामले आते हैं, ऐसी सूरत में आपके द्वारा तय की गई, समय सीमा में काम केसे होगा इस पर विचार किया जाए।

महासंघ आग्रह करता है कि पटवारी, कानूनगो को इस बिल से कोई आपति नही है। पटवारी और कानूनगो को एक माह में कौन-कौन से काम कितनी मात्रा में करेगा, इस बारे एक बिल लाने की कृपा करे। महासंघ चाहता है कि संशोधित बिल को लागू करने से पहले एक बार राज्य कार्यकारणी के साथ बैठक करे। महासंघ ने सरकार को चेताया कि यदि कार्यकारणी के साथ चर्चा किए बिना नए नियम को थोपने की कोशिश की गई, तो महासंघ किसी भी प्रकार का आंदोलन करने पर विवश होगा।

महासंघ के सदस्यों का कहना है कि हर रोज विभिन्न प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट, फ़ोन द्वारा भिन्न -2 सूचनाओं को तैयार करके भेजना, पीएम किसान, स्वामित्व योजना, सीएम सकंल्प शिकायत विवरणी के निपटारे, राहत कार्य, फसल गिरदावरी, निर्वाचन कार्य, लोक निर्माण, वन, खनन, उद्योग आदि अनेकों परियोजनाओं के मौका कार्य एवं संयुक्त निरीक्षण करना।

इसके अलावा इंतकाल दर्ज, उच्च अधिकारियों तथा माननीयों के दौरे में हाजिर होना, विभिन्न न्यायालयों में पेशियों व रिकॉर्ड पेश करने बारे हाजिर होना, राजस्व अभिलेख को अपडेट करना, कार्य कृषि गणना, लघु सिंचाई गणना, धारा 163 के तहत मिसल कब्जा नजायज तैयार करना, जमाबंदी की नकलें सत्यापित करना शामिल है। जो रिकॉर्ड वर्ष 2000 से पहले का कम्प्यूट्रीकृत नहीं हुआ है, उसकी लिखित रूप में नकलें तैयार करना, मौका पर ततीमा तैयार करना, टीआरएस गिरदावरी करना,आरएमएस पोर्टल अपडेट करना, भूमि विक्रय हेतु दुरी प्रमाण पत्र, मेघ चार्ज क्रिएशन, मन्दिर व मेला ड्यूटी, बीपीएल सर्वेक्षण कार्य, आरटीआई से संबधित सूचना तैयार करना, 2/3 विस्वा अलॉटमेंट, धारा 118 की रिपोर्ट सहित सैकड़ों कार्य है। जिन्हें करने में भारी समय व्यतीत हो जाता है और माह के अंत में प्रोग्रेस निशानदेही व तकसीम की मांगी जाती है।

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