May 20, 2024 9:35 am

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पच्छाद कॉंग्रेस में चुनावी शंखनाद कर प्रचार में कूदे टिकट के तलबगार

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Samachar Drishti

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पच्छाद में एकाएक गरमाया चुनावी माहौल,गंगूराम मुसाफिर ने घिन्नीघाड़ तो दयाल प्यारी ने पझौता से शुरू किया जनसंपर्क अभियान,
टिकट की घोषणा से पहले ही सक्रिय हुए नेता लेकिन कार्यकर्ता कशमकश में

समाचार दृष्टि ब्यूरो/सराहां

पच्छाद विधानसभा क्षेत्र हमेशा से ही हॉट रहा है कांग्रेस का गढ़ रहा यह विधानसभा अब वर्ष 2012 से भाजपा की जोली में है। जिसको भाजपा हर हालत ने इस पर अपना वर्चस्व कायम रखना चाहती है। वहीं 32 साल एक छत्र यहां पर कांग्रेस दिग्गज गंगूराम मुसाफिर का राज रहा।

दिलचस्प बात यह है कि जहां पच्छाद कांग्रेस में केवल मुसाफिर ही एक मात्र चेहरा रहे। वहीं अब भाजपा से आईं तेज तर्रार नेत्री दयाल प्यारी ने पच्छाद कांग्रेस में खलवली मचा दी है।

आपको बता दें कि जैसे ही दयाल प्यारी की एंट्री कांग्रेस में हुई मुसाफिर व उनके समर्थकों ने इसका विरोध करना शुरु किया। यही नही बकायदा शिमला पार्टी मुख्यालय में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष कुलदीप राठौर के समक्ष एतराज जताया।

मुसाफिर को दयाल प्यारी के आने से पच्छाद का टिकट छीन जाने का इस कदर डर हुआ की उन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर सोलन में यहां तक कह दिया कि वह हर हालत में पच्छाद से चुनाव लड़ेगें।

हालांकि अब पार्टी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह बन गईं हैं जिससे मुसाफिर खेमे ने राहत की सांस ली है। लेकिन टिकट की जंग जारी है जिसके लिए मुसाफिर कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं।

चुनावी शंखनाद हो चुका है मुसाफिर ने पच्छाद के घिन्नीघाड़ क्षेत्र से जनसंपर्क शुरू कर दिया है। सबसे अहम बात यह है कि इन जनसंपर्क में भीड़ जुटाकर यह सभी के हस्ताक्षर लेकर प्रस्ताव लिखा जा रहा है कि पच्छाद से टिकट के जिताऊ कंडीडेट केवल मुसाफिर ही हैं।

वहीं एक ओर अपना शान्ति रुप से दयाल प्यारी भी लोगों से एक एक कर मिल रही है जिसका श्रीगणेश उन्होंने पच्छाद जे पझौता से कर दिया है। मतलब अब कांग्रेस की यह धड़ेबाजी खुलकर सामने आ गई है। एक ओर जहां पच्छाद में कांग्रेस अपना जनाधार देख रही थी वहां अब यह दो धड़ों में बंट चुकि है। इसका फायदा किसे मिलेगा यह आसन वाला वक्त बताएगा।

कांग्रेस के लिए जहां आम आदमी पार्टी आये दिन झटके पे झटके दे रही है ऐसे में राह उतनी आसान नही है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस का टिकट किसकी जोली में जाता है।

सवाल यह भी उठता है कि अगर कांग्रेस हाईकमान टिकट दयाल प्यारी को देती है तो क्या मुसाफिर इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ेंगे? यह खासकर पच्छाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को परेशान जरूर जर रहा है।

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