Devotional:चिंता छोड़कर सिर्फ ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का करें जाप – आचार्य पंडित मनीराम शर्मा

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आचार्य पंडित मनीराम शर्मा व्यास पीठ से भक्तों को कथा श्रवण करवाते हुए
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जाप करने और महादेव के प्रति निश्चल प्रेम रखने की प्रेरणा देता है श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ

समाचार दृष्टि ब्यूरो/ नाहन

जिला सिरमौर के धगाना गांव में चल रहे दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्तों को देवी संध्या की कथा का श्रवण करवाया गया। आचार्य पंडित मनीराम शर्मा ने व्यास पीठ से भक्तों को कथा श्रवण करवाते हुए बताया कि शिव महापुराण (विशेषकर रुद्र संहिता) में देवी संध्या की कथा एक अत्यंत पवित्र और तपस्यापूर्ण आख्यान है। देवी संध्या ब्रह्मा की मानस पुत्री थीं, जिन्होंने शिव की कठोर तपस्या कर वरदान प्राप्त किया और बाद में मेधातिथि के यज्ञकुंड में आत्मदाह कर अरुंधती (महर्षि वशिष्ठ की पत्नी) के रूप में पुनर्जन्म लिया। वे पवित्रता, तपस्या और आत्मसमर्पण की प्रतीक मानी जाती हैं। शिव महापुराण में के अनुसार संध्या देवी संध्या का जन्म ब्रह्माजी के मन से हुआ था।
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उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा से चंद्रभागा नदी के तट पर कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें ज्ञान और वरदान दिया। शिव के निर्देश पर, उन्होंने अपना पुराना शरीर त्यागने के लिए मेधातिथि ऋषि के यज्ञकुंड में अग्नि प्रवेश किया। यज्ञकुंड से वे एक कन्या के रूप में पुन: प्रकट हुईं और मेधातिथि की पुत्री कहलाईं, जिन्हें बाद में ‘अरुंधती’ के नाम से जाना गया। अरुंधती का विवाह महर्षि वशिष्ठ के साथ हुआ। वे सप्तर्षि मंडल में अपने पति के साथ स्थापित हुईं और भारतीय संस्कृति में विवाह के समय अरुंधती नक्षत्र को पवित्रता के रूप में दिखाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, संध्या के देह त्यागने से जो पवित्रता उत्पन्न हुई, वही समय ‘प्रातः और सायंकाल की संध्या’ के रूप में पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

धगाना गांव में चल रहे दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन देवी संध्या की कथा का श्रवण करते भक्तगण
धगाना गांव में चल रहे दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन देवी संध्या की कथा का श्रवण करते भक्तगण

शिव महापुराण में इस कथा को भक्त की अटूट श्रद्धा और महादेव की कृपा के रूप में बताया गया है। कथा में भक्तों को श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप करने और महादेव के प्रति निश्चल प्रेम रखने की प्रेरणा दी जाती है। कथा में बताया गया कि चिंता छोड़कर सिर्फ ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का जाप करें, जिससे जीवन में अपने आप सुख और शांति आएगी। कलयुग में जब तक शिवपुराण हमारे जीवन में शामिल नहीं होता, तब तक कलयुग के कष्ट परेशान करते हैं। भगवान शंकर की शरण में जाने से तीनों ताप (दुख) दूर हो जाते हैं। कथा में जीवन की चिंताओं को भगवान शिव पर छोड़ देने और निश्चल भाव से उनकी भक्ति करने पर जोर दिया गया है।

इस शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन हिमाचल प्रदेश सचिवालय से सेवानिवृत्ति उपसचिव जगत राम ठाकुर, पत्नी बेलमंती देवी, पुत्र रनवीर ठाकुर व मोनी ठाकुर द्वारा क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए करवाया जा रहा हैं।

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