
रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों में तेंदुआ की दहशत और विभाग के खिलाफ रोष
समाचार दृष्टि ब्यूरो / सराहां (सिरमौर)
जिला सिरमौर के सराहां वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काहन गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब सुबह-सवेरे एक रिहाइशी इलाके के पास बने टैंक में तेंदुआ फंसा हुआ पाया गया। हाईवे और पेट्रोल पंप के समीप खेत में बने इस खाली टैंक में तेंदुए के गिरने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
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सुबह-सवेरे गूँजी दहाड़, ग्रामीणों की थमी सांसें
घटना की जानकारी सबसे पहले एक स्थानीय राजस्व अधिकारी को मिली, जिन्होंने टैंक के भीतर से तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनी। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। तेंदुआ रात के अंधेरे में शिकार की तलाश में निकला होगा और अनजाने में हाईवे के किनारे बने इस गहरे खाली टैंक में जा गिरा।
वन विभाग का ‘सरल’ रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। विभाग ने तेंदुए को बेहोश करने या पिंजरे में डालने के बजाय एक पारंपरिक तरीका अपनाया। टैंक के भीतर लंबी लकड़ियाँ और डंडे डाले गए। इन डंडों के सहारे तेंदुआ फुर्ती से बाहर निकला और सीधे साथ लगते जंगल की ओर भाग गया। हालांकि विभाग इसे एक सफल और त्वरित रेस्क्यू मान रहा है, लेकिन ग्रामीणों की राय इससे बिल्कुल जुदा है।
“खतरा टला नहीं, लौट आया है” – ग्रामीणों का भारी विरोध
तेंदुए को मौके पर ही जंगल में छोड़ दिए जाने से काहन गांव के निवासी बेहद नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह तेंदुआ काफी समय से गांव के आसपास देखा जा रहा है। अब तक यह कई पालतू कुत्तों को अपना निवाला बना चुका है। आबादी के इतने करीब तेंदुए को छोड़ना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है।
ग्रामीणों का तर्क
“विभाग को चाहिए था कि इसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर कहीं दूर घने जंगल या रेस्क्यू सेंटर भेजा जाता। अब हमें डर है कि यह दोबारा गांव में घुसकर हमारे मवेशियों या बच्चों पर हमला कर सकता है।”
दहशत के साये में काहन गांव
फिलहाल, तेंदुआ जंगल में ओझल हो चुका है, लेकिन काहन गांव के लोगों की रातें अब जागकर कट रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं और यदि संभव हो तो यहाँ पिंजरा लगाया जाए ताकि भविष्य में किसी भी जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।
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